Baune khwaab mere bas aasman tak jate hain….

न जानें आधे सफर से क्यूँ लौट आते हैं, बौने ख्वाब मेरे बस आसमाँ तक जाते हैं, एक अजीब सी दुश्मनी है मुझसे मेरी, अरे! मेरे हाथ ही मेरा गला दबाते हैं.....

Ateet ke chashme..

मेज़ पर टूटे पड़े चश्मों से मैंने गर्द झाड़े, आज के पर्दे हटाकर, खोल दी कल की किवाड़े, सूखे यादों पर फिर बरसी, दृष्टि की घनघोर मेघा, हाँ! मैंने ज़िन्दगी को फिर उसी चश्में से देखा......

Virani

न कोई आवाज़, न कोई आहट, बस सन्नाटा, बस एक अनसुना सा शोर सुनाई देता है, शायद ये मैं खुद ही हूँ जो शोर मचाता हूँ, अपनी तन्हाई में खुद का साथ निभाता हूँ...............

Mujhe ab zaher kiska kahan kitna lagega??…

गला मेरा छुड़ाओ कहाँ मैं फँस गया हूँ, है बड़ी मिलनसार बस्ती कहाँ मैं बस गया हूँ, खुद बाँधा था मैंने खुद को डोरियों में, आज दम घुट रहा है मैं इतना कस गया हूँ...........

Bahut tum yad aate ho,bahut tum yad aate ho..

सरहद सुबह की शाम को जब चूमती है, जब किरणें सुर्ख होकर फलक में झूमती हैं, जब सूरज ज़र्द होकर शाम को नीचे उतरता है, बहुत तुम याद आते हो, बहुत तुम याद आते हो.........